Tuesday, April 17, 2018

देखें! मानवता के चश्में से [अनुसूचित कहना भी है अपमानजनक ]



देखें! मानवता के चश्में से
[अनुसूचित कहना भी है अपमानजनक


आज बाहर टहलने निकले तो देखा!कि आज भी गांवों में मैला ढ़ोतीं गरीब महिलाओं को जिनसे नाक - भौं सिकोड़तीं कुछ महिलाएं और लोग उन्हें अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुये। सोचा! कि आखिर! इस स्वंय सहायताकारी समाज का कसूर क्या है? आज हम सभी धोती कुर्ते से जींस और पेंट पर आ गये पर जालिम! नज़र और नज़रिया है कि बदलता ही नही। आखिर! यह बात हम कब समझगें कि सबसे पहले वह और हम इंसान हैं। और सम्मान पर सभी का समान हक है। जरा मानवता के चश्में से देखिये कि... उनका दिल शायद यही कहता होगा कि समस्त सभ्यताओं का निर्माण किया हमने। आपके भवन, सड़कें, नहरें,तालाब, नाले, नालियाँ बनाये हमने।आपको जूते पहनाये हमने, आपके पहने हुये जूतों तक को गंदा होने से बचाया हमने। आपके कदमों को कांटो और गंदगी से बचाया हमने। आपकी गलियाँ, नालियाँ, गटर साफ किये हमने । अस्पतालों की गंदगी साफ की हमने, पोष्टमार्टम किया हमने। युगों - युगों से इतनी बुनियादी सेवा एवं बुनियादी सहायता करने के बाद हमें उपाधियाँ दी गयीं- नीच, अछूत, शूद्र, अनुसूचित एवं दलित? बताइये! हमें नीच कहने वालों शर्म करो कि नीच और ऊँच तो विचार और मानसिकता हुआ करती है, व्यक्ति नही। और जब तक यह दकियानूसी और बीमार मानसिकता स्वस्थ नही होती, हम कभी भी प्रगृति नही कर सकते। खुद से प्रश्न करो कि जब भगवान् सभी का प्रसाद गृहण करते हैं तो आप उनसे भी ऊपर हैं क्या? हद है कि गंदगी फैलायें आप और साफ करें हम। क्या हम सभ्य एवं स्वच्छ मानव नही? क्या हम परमपिता परमात्मा के अंश - वंश नहीं। हर धर्मग्रंथ का सार है कि बुनियादी सहायता से बड़ा कोई मानव देश कर्म नही और बुनियादी सेवा से बढ़कर कोई नागरिक राष्ट्र धर्म नहीं।

ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना

Monday, April 16, 2018

रेपिस्टों को मिले तुरंत फांसी-


शब्द भी थर्रा उठे... 

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मानवता को शर्मसार कर देने वाली कठुआ और उन्नाव गैंग रेप की घटनाओं को लेकर इन दिनों देश में बेहद गुस्से और आक्रोश का माहौल बना हुआ है। सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर अनेकों कैंपेन चलाये जा रहे हैं, सड़कों पर विरोध प्रदर्शन वहीं कैण्डलमार्च निकल र रहे हैं, और सियासत में कहीं चुप्पी तो कहीं घमासान मचा है। दोषियों को मौत की सजा सुनाने की चहुँओर मांग उठाई जा रही है। ऐसे में, अगर देश में होने वाले रेप की वारदातों के आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि कड़े कानूनों के बावजूद रेप की वारदातें थमने का नाम ही नहीं ले रहीं।  ये आंकड़े मुँह चिढ़ा रहे मानो प्रशासन और न्याय व्यवस्था पर,वहीं महिला सुरक्षा के प्रति किये गये तमाम इंतजाम, योजनाओं  व दावों की पोल भी खोलते दिख रहे हैं। 
        आज जम्मू-कश्मीर के कठुआ के बाद गुजरात के नामी शहर सूरत से इंसानियत को शर्मसार कर देने वाली घटना सामने आई है कि वहां 11 वर्षीय एक बच्ची का शव मिला था और पोस्टमॉर्टम रिपोर्ट से उसके साथ निर्दयता से बलात्कार किए जाने की पुष्टि हुई है। ऐसी खबरें सुनकर ही कलेजा मुंह को आता है कि कैसे गरीब अपने बच्चों की हिफाजत करे। कल सब्जीवाले को कहते सुना कि मैं अपनी बच्ची को घर से न निकलने दूंगा और उसका बालविवाह करूंगा। यह सुनकर मेरे मन रो उठा कि सजा आखिर! निर्दोष बच्चियों को ही क्यों? इसमें मासूमों का क्या दोष? पता नही हमारा देश कहाँ जा रहा है अगर हम फिर पुरानी रूढ़िवादियों की तरफ लौटे तो विकसित भारत के सपने का पूर्णरूपेण पतन हो जायेगा। हमें समय रहते जागना होगा।


क्या कहतें हैं आकड़ें -

         नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो ताजा आंकड़ों के मुताबिक देश में हर एक घंटे में 4 रेप की वारदात होती हैं। यानी हर 14 मिनट में रेप की एक वारदात सामने आती है।तथा, 
- देश में औसतन हर 4 घंटे में एक गैंग रेप की वारदात होती है।
- हर दो घंटे में रेप की एक नाकाम कोशिश को अंजाम दिया जाता है। 
- हर 13 घंटे में एक महिला अपने किसी करीबी के द्वारा ही रेप की शिकार होती है।
- 6 साल से कम उम्र की बच्चियों के साथ भी हर 17 घंटे में एक रेप की वारदात को अंजाम दिया जाता है 
लचर कानून व्यवस्था के चलते - महिलाओं के यौन उत्पीड़न और बलात्कार के 31 फीसदी मामले अभी भी अदालत में  लंबित हैं। और राष्ट्रीय अपराध रिकार्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) के मुताबिक मध्यप्रदेश रेप के मामले में गत वर्ष भी देश में पहले स्थान पर ही था। एनसीआरबी के आज जारी ताजा आंकडों के अनुसार 2017 में देश में 28,947 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज की गयी. इसमें मध्यप्रदेश में 4882 महिलाओं के साथ बलात्कार की घटना दर्ज हुई, जबकि इस मामले में उत्तर प्रदेश 4816 और महाराष्ट्र 4189 की संख्या के साथ देश में दूसरे और तीसरे राज्य के तौर पर दर्ज किये गये हैं।इसके साथ ही नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले में भी मध्यप्रदेश देश में अव्वल स्थान पर है। मध्यप्रदेश में इस तरह के 2479 मामले दर्ज किये गये जबकि इस मामले में महाराष्ट्र 2310 और उत्तरप्रदेश 2115 के आंकड़े के साथ क्रमश: दूसरे और तीसरे स्थान पर है।पूरे भारत में 16,863 नाबालिग बालिकाओं के साथ बलात्कार के मामले दर्ज हैं। जोकि बेहद शर्मनाक स्थिति है। वहीं बच्चों के यौन शोषण में सरकारी आंकड़े दिल दहलाने वाले हैं. एक साल में बच्चों के साथ बलात्कार के 8800 मामले. लेकिन टीवी न्यूज, न्यूजपेपर, सोशल नेटवर्किंग साइट्स पर हर घंटे पर रेप की खबर देख और सुन हर बच्चा वेदना के सौ फीसदी अनुभव से गुजर रहा है और ये आंकड़ा सिर्फ उन बच्चों का है जिनकी रिपोर्ट दर्ज कराई गई है। असली संख्या के बारे में सोच कर रूह कांप जाती है। क्योंकि राष्ट्रीय अपराध रिकॉर्ड ब्यूरो के आंकड़े ये भी दिखाते हैं कि करीब 95 प्रतिशत मामलों में अपराधी बच्चों के अपने ही परिचित के लोग थे। यह आंकड़े समाज की आंखें खोल देने वाले हैं ताकि उन पर बहस हो सके और समस्या से निबटने का रास्ता निकाला जा सके।पर टीबी डिबेट में बहस नही झगड़ा होता, यहां तक की सदन में झगड़ा होकर सदन की कार्यवाही ही ठप कर दी जाती है। हम सब ने चुन कर इसीलिए भेजा था कि आप हमारी आवाज़ बने पर ऐसा होता दिख नही रहा। 


कानून बने पर भ्रष्टाचार के भेंट चढ़े-

        निर्भया बलात्कार केस के बाद कानूनों में बदलाव
किये गये, कानूनों को पहले से ज्यादा सख्त बनाया गया इस उम्मीद में कि शायद महिलाओं के साथ होने वाली आपराधिक वारदात कुछ कम होंगी लेकिन आंकड़े ये बताते हैं कि ना तो महिलाओं के खिलाफ अपराधों की संख्या में कमी आई और ना ही उन्हें न्याय दिलाने की प्रक्रिया ने रफ्तार पकड़ी--
- यौन उत्पीड़न की शिकार महिलाओं को जल्द से जल्द न्याय दिलाने के लिए देश में 275 फास्ट ट्रैक कोर्ट बनाए गए हैं लेकिन ये कोर्ट भी महिलाओं को कम वक्त में न्याय दिलाने में नाकामयाब रहे। 
- हालत यह है कि महिलाओं के खिलाफ अपराध से जुड़े 332 से ज्यादा मामले इस वक्त सुप्रीम कोर्ट में लंबित हैं। और देश भर की उच्च न्यायालयों में ऐसे लंबित मामलों की संख्या 31 हज़ार 386 है। तथा देश की निचली अदालतों में 95 हज़ार से ज्यादा महिलाओं न्याय को तरसी पथरायीं आँखे इंतज़ार कर रही हैं। 
Criminal law Amendment Act 2013 कहता है कि रेप के मामलों की सुनवाई निश्चित समय में पूरी की जानी चाहिए लेकिन बहुत कम मामलों में ही ऐसा हो पाता है।  
रेप के सबसे चर्चित मामले में बाबा राम रहीम ने दो बेटियों के साथ बलात्कार किया पर दस हजार जुर्माना और दस साल की सजा सुनाई गयी।किसी के जीवन से खेलने के एवज में क्या यह सजा काफी है? 
 आसाराम ने  एक नाबालिग समेत 3 महिलाओं का यौन उत्पीड़न और रेप किया। आसाराम को सितंबर 2013 में पुलिस ने गिरफ्तार किया और वो तब से वह जोधपुर की जेल में बंद हैं लेकिन 2 वर्ष और 2 महीने बीत जाने के बाद भी इस मामले का ट्रायल अभी बाकी है। इससे बलात्कारियों के हौसलें नही बढ़ेगें तो और क्या होगा। 
- दिल्ली में जनवरी 2014 में डेनमार्क की एक महिला के साथ 3 नाबालिगों सहित कुल 9 लोगों ने गैंगरेप किया था। पुलिस ने दोषियों को गिरफ्तार भी कर लिया लेकिन करीब 2 साल बाद भी इस मामले में अभी तक पीड़िता को न्याय नही मिला। 

 सरकारी योजनाओं की जबरदस्त सुस्ती- 

      मीडिया व आमजन के आक्रोशरूपी दवाब के चलते सन् 2013में एक हज़ार करोड़ रुपयों का निर्भया फंड शुरू किया था। वर्ष 2013-14 से लेकर 2015-16 तक इस फंड में तीन हज़ार करोड़ रूपये दिए जा चुके हैं।
- मिनिस्ट्री ऑफ वूमिन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट को इस फंड के सही इस्तेमाल का काम सौंपा गया है। दुखद सच्चाई ये है निर्भया फंड लागू किए जाने के बाद से लेकर अब तक इसमें 2 हज़ार करोड़ रूपये की वृद्धि होने के बावजूद ज़मीनी स्तर पर पीड़िताओं की सुरक्षा से सम्बंधित कठेर कदम दिखाई नहीं दे रहे।
-  गृह मंत्रालय ने GPS यानी Global Positioning System के लिए Computer Aided Dispatch Platform तैयार करने की योजना बनाई थी जिसकी मदद से पुलिस को जल्द से जल्द पीड़ित महिला के पास पहुंचने में मदद मिलती पर ये प्रोजेक्ट 114 अलग-अलग शहरों में लागू करने के आदेश थे और निर्भया फंड से इस प्रोजेक्ट के लिए 321 करोड़ रुपये की रकम भी दे दी गई है पर ढ़ाक के वही तीन पात। 
-मिनिस्ट्री ऑफ वूमिन एंड चाइल्ड डेवलपमेंट ने पीड़ित महिला की मदद के लिए दो योजनाएं लागू किए जाने की बात कही थी जिनमें से एक थी हिंसा की शिकार महिलाओं के लिए One Stop Centre बनाने की योजना। ये 18 करोड़ 58 लाख रुपये की लागत से बननी थी जबकि दूसरी योजना थी Women Helpline की जिसकी लागत 69 करोड़ 49 लाख रुपये थी। इसके लिए वित्तीय वर्ष 2015-16 में रकम जारी करने की अनुमति भी मिल गई थी लेकिन कर्नाटक और केरल को छोड़कर किसी भी दूसरे राज्य ने इस पर अपना प्रोपोजल नहीं भेजा गया। सरकारी योजनाएं बिना सही माार्गदर्शन और क्रियान्वयन के अभाव में फुस्स हेतीं दिखायीं पड़ती हैं। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन की रूह कपां देने वाली रिपोर्ट - 

'विश्व स्वास्थ संगठन के एक अध्ययन के अनुसार, 'भारत में प्रत्येक 54वें मिनट में एक औरत के साथ बलात्कार होता है।’ वहीं महिलाओं के विकास के लिए केंद (सेंटर फॉर डेवलॅपमेंट ऑफ वीमेन) अनुसार, ‘भारत में प्रतिदिन 42 महिलाएं बलात्कार का शिकार बनती हैं। इसका अर्थ है कि प्रत्येक 35वें मिनट में एक महिला के साथ बलात्कार होता है।’


क्या कहा न्यायालय ने-

 भारतीय सर्वोच्च न्यायालय का कहना है कि बलात्कार से पीड़ित महिला बलात्कार के बाद स्वयं अपनी नजरों में ही गिर जाती है, और जीवनभर उसे उस अपराध की सजा भुगतनी पड़ती है, जिसे उसने नहीं किया। 

सबसे बड़ा पेंच -

      आप समझते ही होगें कि सबसे बड़ा पेच है कि बलात्कार की रिपोर्ट आसानी से नही लिखी जाती और क्या कहेगें लोग जैसी हीनभावना के चलते पीड़िता  पुलिस तक पहुंचने की हिम्मत जुटाने में इतना वक्त ले लेती है कि फॉरेंसिक साक्ष्य नहीं के बराबर बचते हैं. उसके बाद भी वकीलों के सवाल, समाज की सवालियां नजरें, कानून की पेचीदगियाँ कुछ ऐसी हैं कि ये बलात्कार पीड़िता पूरी तरह बिखर जाती है और कभी - कभी पुख्ता सबूत न होने पर अपराधी बच निकलते हैं और वह अलग - अलग शहरों में जाकर कुकर्त्यों को अंजाम देते रहते हैं, और यह दरिंदगी का सिलसिला बदस्तूर जारी है। यह तब जबकि खुद को हम प्रगतिशील और लोकतांत्रिक कहने वाले देश बेटियों को बराबरी और सुरक्षा देना सदी की सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं। आप क्यों नहीं खोल देते हर जिले में फांसीघर जहां हर रेपिस्ट को सार्वजनिक तौर पर फांसी दी जाये जिससे हर व्यक्ति छेड़छाड़ करना तो दूर सोचने से भी डरे। साथ ही साथ  समाज को भी इसमें पूरा सहयोग देना पड़ेगा, यौन अपराधों में स्त्री के चरित्र को दूषित मानने के बजाए दोषी को चरित्रहीन कह कर बहिष्कार करना आवश्यक होना चाहिए। सच तो यह है कि आबरू लूटने वाले की आबरू पहले लुटती है। पीड़िता को शर्मिंदगी क्यों? शर्म तो उन हैवानों को आनी चाहिए जिनके दिल और दिमाग दोनों ही नही होते।साथ ही क़ानून में सख्ती और तुरंत न्याय परमावश्यक है। 

समाज का भद्दा नजरिया - 

         समाज का भद्दा नजरिया यह भी है कि अगर वो मॉडर्न है तो उसे लोग ‘हथियाने के लिये तैयार’ मानते हैं. वो उसके साथ कुछ भी करने के लिए सोचते हैं. हमें सिखाया ही नहीं गया कि लड़कियां भी लड़कों जैसी ही होती हैं, उनकी मर्ज़ी के खिलाफ़ सेक्स नहीं करना चाहिए. इसके अलावा जो मीडिया हैं समाज में मेसेज देने वाले, उनमें अगर सेक्सुअल वॉयलेंस दिखाया जाएगा, हम अभी भी मीडिया के तौर पर उतने सेंसिटिव नहीं हुए.भडंकाऊ असभ्यभाषी शब्द म्यूज़िक, सर्वसुलभ पोर्नवीडियो, गंदे सॉन्ग या कामुक फिल्मी दृश्य और भड़काऊ विज्ञापनों में महिलाओं को ‘ खूबसूरत वस्तु’ की तरह पेश किया जाता है. जब तक यह मानसिकता नही सुधरेगी तब तक अनुकूल परिणाम सम्भव नही। 

रेपिस्टों के खिलाफ़ खड़ा हुआ पूरा देश-




कई फिल्मस्टारों ने सड़कों पर उतर कर अपना गुस्सा जाहिर किया और रेपिस्टों के खिलाफ़ फांसी की मांग की वहीं उद्योगपति महिंद्रा ग्रुप के चेयरमैन आनंद महिंद्रा भी इन घटनाओं से  इतने आहत हुये कि उन्होंने ट्विटर पर अपने गुस्से को जाहिर करते हुये लिखा- कि जल्लाद की नौकरी ऐसी नहीं है कि हर कोई उसे चाहे. लेकिन अगर रेप करने वालों आरोपियों और छोटी बच्चियों को मारने वालों को सज़ा देने की बात हो तो मैं ये नौकरी खुशी-खुशी करना चाहूंगा। 


टाईम्स ऑफ इंडिया के बेबाक क्राइम रिपोर्टर माइटी इकबाल जी के शब्द रोष.. 
               आज बलात्कारों और गैंगरेप के लिये प्रतिदिन शर्मसार होते वह भारत जो अपनी पावन और मर्यादित सभ्यता और संस्कृति का पाठ पढ़ाने वाले विश्वगुरू का दर्जा हासिल करने वाला विश्वविख्यात विश्वसम्मानीय राष्ट्र बना जो आज विकासरथ पर आरूढ़ बन अंतरिक्ष को नापने की शक्ति रखने वाला सूर्य समान वही तेजोमय भारत जो आज बच्चियों और महिलाओं पर होने वाले बलात् पाप की अपकीर्ति से दिन प्रतिदिन शर्मसार हो रहा है। यह हम सभी भारतीयों के लिये डूब मरने जैसी बेहद अपमानजनक बात है। अब, समय की मांग और अस्तित्व की पुकार है कि अब हमें बच्चों और महिलाओं के यौन शोषण को रोकने के लिये बेहद सख्त शुरूआत करनी होगी। कि जिससे हैवानियत भरी मानसिकता थर्रा उठे और स्वच्छ मानसिकता वाले मर्यादित भारत की पुनर्स्थापना हो सके।


स्वतंत्र विचार
-ब्लॉगर आकांक्षा सक्सेना 


Friday, April 13, 2018

आज ही के दिन 13 अप्रैल को हुआ था जलियांवाला बाग हत्याकांड :



आज ही के दिन 13 अप्रैल को हुआ था जलियांवाला बाग हत्याकांड : 




 [उसे दिन नही रात कहें....या कहें इतिहास का आँसू
जब मासूम बेकसूर चीखें कुए में खामोश हुईं....
                          - ब्लागर आकांक्षा सक्सेना ]

13 अप्रैल का वह काला दिन जिसे दिन नही हम रात ही कहेगें.... तारीख थी, 13अप्रैल1999 उस समय देश का शासक जॉर्ज पंचम था और वायसराय फ्रेड्रिक था। उस दिन बैसाखी का पावन पर्व था। उसी के उपलक्ष्य में हजारों की संख्या में लोग अमृतसर के जलियांवाला बाग में इकट्ठे हुए थे और अचानक एक क्रूर अंग्रेज  जनरल डायर अपने सिपाहियों के साथ वहां पहुंचा और बिना किसी चेतावनी के उसने वहां मौजूद मासूमों व निहत्थे लोगों पर गोलियां बरसाना शुरू कर दिया जिससे वहां भगदड़ मच गई और हर कोई अपनी जान बचाने की कोशिश में लग गया।  लेकिन जलियांवाला बाग की बनावट कुछ ऐसी थी कि वहां से आने और जाने का सिर्फ एक ही गेट था। पर वहाँ एक कुआं जरूर था।


जो लोगों की प्यास बुझाने के बदले मासूमों का खून चखा।  उस बाग के हर तरफ लोगों के घर थे और ऊंची-ऊंची दीवारें थीं। घबराये लोग अपनी जान बचानेहेतु एक-दूसरे को कुचलते हुये  उन दीवारों पर चढ़ने की नाकाम कोशिश करने लगे और यह गोलियां पूरे10 मिनट तक अनवरत चलती रहीं। जब गोलियां खत्म हुईं, हर तरफ लाशें ही लाशें थीं। उस समय के सरकारी रिकॉर्ड के हिसाब से 379 लोगों की जबरन अकाल मौत हुई थी लेकिन सच तो यह है कि हकीकत में 1000 से ज्यादा लोग मारे गए थे और 2000 से ज्यादा घायल हुए थे। यह देश के इतिहास में हुए सबसे भयानक जनसंहारों में एक था। जिसे सुन कर आत्मा रो उठती है और कहती है कि तब हम परदेशियों के गुलाम थे और आज स्वदेशियों के.....।

देश के अमर शहीदों
को आत्मिक
शत् शत् नमन
🙏🙏🙏💐

ब्लागर आकांक्षा सक्सेना
akaksha11.blogspot.com

Wednesday, April 11, 2018

सेलेब स्पीच - सिंगर ज्ञानेश कुमार वर्मा जी


गायक ज्ञानेश कुमार वर्मा जी 


                                    Gyaanesh Verma
                 Singer/CEO
                                   Cherryberry Integrated 
                                   Marketing Pvt Ltd.
                                   MUMBAI & NASHIK







https://youtu.be/BTTFR7gz7m8
https://youtu.be/aoJEW2iAdU4
              https://youtu.be/UUhIf2eo24E



सेलेब स्पीच - गायक ज्ञानेश कुमार वर्मा जी 





अच्छे गायक बनने के लिये जरूरी है पहले अच्छा इंसान होना। 

      - सिंगर ज्ञानेश कुमार वर्मा
       (व्यॉयस ऑफ आरडी वर्मन) 


           



नमस्कार दोस्तों ! आप सभी जानते हैं कि हमारी भारतभूमि पावन देवी-देवताओं की जननी मानी गयी है | यहाँ की पावन भूमि से न जाने कितने शूरवीरों व समाजसुधारकों व नृत्य, गायन - वादन कलाकारों ने जन्म लेकर अपने सुकर्मों और अपनी सुरीली, मीठी आत्मा को सुकून देने वाली मधुर आवाज़ से देश-दुनियां में अपनी प्रतिभा और पहचान से भारत का नाम सारी दुनियाँ में ऊँचा कर दिखाया। ऐसे ही महान व्यक्तित्वों का जन्म हमारी भारतभूमि को धन्य करता है| इसी कड़ी में हम नाम जोड़ना चाहेगें : 
        जो देश के बेगद प्रगतिशील औद्योगिक नगर जमशेदपुर (झारखंड राज्य) के गौरव व देश के महान गायक रत्न व बहुमुखी प्रतिभा के धनी सर्वसम्माननीय बेहतरीन शख्शियत आदरणीय श्री ज्ञानेश कुमार वर्मा जी का जो किसी परिचय के मोहताज नही जोकि (व्यॉयस ऑफ आर. डी. वर्मन) के नाम से विश्वविख्यात शख्सियत हैं |

आइये! दोस्तों प्रस्तुत हैं सिंगर ज्ञानेश कुमार वर्मा जी से बातचीत के कुछ अंश - 


सवाल - आपका पूरा नाम सर ?


जवाब- मेरा नाम ज्ञानेश कुमार वर्मा, पिता श्री मोहन एवं माता श्रीमती प्रेममयी वर्मा जी।

सवाल- आपके जन्म स्थान व बचपन की कोई सुन्दर याद के बारे में बतायें?


जवाब - मेरा जन्म स्थान है जमशेदपुर (झारखंड राज्य)। हमारे पिताजी भारतीय रेल मे कार्यरत थे। सो बचपन में समय- समय पर उनके तबदला होने के कारण भारत भ्रमण में ही गुजरा। ग़ाने का शौक बचपन से ही था।  पारिवारिक उत्सवों मे गीत गाते- गाते कभी कभार दुर्गा पूजा आदि मौकों पर स्टेज पर भी  गाने का अवसर मिलता था लेकिन चूंकि परिवार में पढ़ाई लिखाई को ज्यादा महत्व दिया जाता था। ज्यादा कुछ करने की उम्मीद नही थी। एक बार मैं बिना पर्मिशन लिये के एक स्टेज प्रोग्राम में हिस्सा लेने चला गया। वहां “एक रास्ता है जिंदगी” और “चांद जैसे मुखड़े पे बिंदिया सितारा” गीत पेश किया। बाल कलाकार के रूप में गाया हुआ मेरा गीत बेहद हिट रहा। आयोजकों ने मुझे नगद 101/- पुरस्कार देने का तय किया। मैं भी खुश लेकिन बिजली तो तब गिरी सर पर जब मुझे पुरस्कार देने के लिये उस जगह के रेलवे ऑफिसर होने के नाते,  मेरे ही पिताश्री मुख्य अतिथि बन कर मंच पर आये। उन्हें देखकर मैं तो कन्नी काट कर भागने लगा लेकिन आयोजकों ने जबरन स्टेज पर चढ़ा दिया लेकिन प्रसन्नता में मन भर उठा जब पिताजी ने अपनी तरफ से 50/- रुपये और दिये और कहा “वेल डन” पर घर पर बता कर क्युं नही आये बेटा? अगली बार ऐसी गलती मत करना। इसके बाद से घर पर भी मुझे ज्यादा कुछ बोला नही गया बल्कि काफ़ी तारीफ़ हुई। शायद यही मेरी सफलता की पहली सीढ़ी थी।

 सवाल- आपको संगीत/गाने का सुरूर कब चढ़ा?


जवाब - संगीत का शौक बचपन से रहा। घर में मुझे से पहले मेरे बड़े भाई पारिवारिक समारोहों में गीत गाया करते थे और माताजी भी घरेलू स्तर पर अच्छा गाया करती थी। गाने का सुरूर तब चढ़ा जब मैं स्कूल में था। तब सभी प्रतियोगिताओं मे भाग लेता था और पुरस्कार अर्जित करता था। क्लास 6 के बाद से ही मैं केंद्रीय विद्यालय वायूसेना नगर नागपुर में हॉस्टल में रह कर पढ़ा। हॉस्टल और स्कूल के हर कार्यक्रम में मुझे आगे कर दिया जाता था। जिससे मुझे काफी प्रोत्साहन मिला। वहा संगीत के साथ - साथ खेल कूद और पढ़ाई मे हमेशा आगे ही रहने की कोशिश रही। बास्केटबाल में मैने नेशनल स्तर तक खेला तथा 1987 में अपने स्कूल का स्कूल कैप्टन भी बना।  आज भी मेरे स्कूल के दोस्त मुझे एक गायक के नाम से ही जानते हैं।धीरे- धीरे कॉलेज स्तर पर भी यही चलता रहा। 1994 से 2007 के दरम्याँ मैंने भारत में लगभग हर बडे शहर में अपने शो किये। यह कह सकता हूँ की उम्र के 8 साल से यह संगीत की समीपता शुरू हुई और आज तक है। दिन पे दिन बढ़ती ही जा रही है। 


सवाल- आपको इस फील्ड में आये कितना समय हो गया और आपका इस फील्ड में क्या संघर्ष रहा?


जवाब- व्यवसायिक तौर पर मैं 1993 से स्टेज से जुड़ा हुआ हूं। अखिल भारतीय गंधर्व महविद्यालय पुणे से मैंने शाश्त्रीय संगीत मे “संगीत विशारद” की डिग्री हासिल किया। 
संघर्ष तो बहुत ज्यादा रहा। कायस्थ परिवार की होने के कारण पढ़ाई का विशेष प्रेशर रहा।1993 तक मैंने बी कॉम, एल एल बी, तथा कम्पनी सेक्रेटरी की डिग्री हासिल की तथा, 2008 में पुणे सिमबायोसिस से एम बी ए की डिग्री भी हासिल की। पढ़ाई और संगीत दोनों का समन्वय वो भी व्यवसायिक स्तर पर करना बहुत मुश्किल था। उपर से संगीत के क्षेत्र में एक से बढ़ कर एक गायक थे। बहुत ज्यादा कम्पटीशन था। फिर भी मैं अपने पढ़ाई और नौकरी के साथ- साथ अपने गायन को हमेशा जागृत रखा। कई बार बिना किसी मेहनताना के पैसे लिये बगैर और अपने जेब से पैसे लगा कर कार्यक्रम किया। बार - बार लगातार आयोजकों और साथी कलाकरों ने मौका पाकर मुझे धोखा दिया और मेरे पैसे निगल गये। प्रतियोगिताओं  में पैसे लेकर पुरस्कार के होड मे शामिल न हो पाया क्योंकि मुझे अपने आप पर भरोसा था। संगीत में कुछ कर गुजरने कि मेरी चाहत, मुझे अपने मार्ग से डिगा ना सकी।संगीत के क्षेत्र में अपना नाम बनाने में बहुत समय लगता है तथा संयम से काम लेना होता है। आज लगभग 25 वर्षों के सफर की बाद मैं अपना एक मुकाम बना पाने मे सक्षम हुआ हू।

सवाल- आपको अपनी लाईफ में व संगीत लाईन में सबसे ज्यादा सहयोग किसका मिला?


जवाब- मेरे जीवन में सबसे ज्यादा सहयोग मुझे अपने मां पिताजी जी से मिला और ईश्वर की कृपा से आज भी मिल रहा है। व्यक्तिगत जीवन में बहुत सारी विपरीत परिस्थितिया आयीं और मेरे धैर्य का बांध टूटने ही लगा, पर पारिवारिक सहयोग से मुझे बहुत बल मिला। संगीत में मेरी गुरु श्रीमति आनंद्वल्लि नटराजन, श्री चंदन सर और मध्य भारत की ख्यात नाम संस्था मीरा नृत्य निकेतन कि निदेशक श्रीमती मीरा चंद्रशेखरण का आभार मैं जीवन भर शब्दों से व्यक्त ना कर पाउंगा।आज मैने जो कुछ भी स्थान पाया है, सिर्फ अपने गुरुओं के बदौलत पाया है।व्यवसायिक तौर पर फिल्म इंडस्ट्री के अनेक कलाकारों ने समय- समय पर बहुत सहयोग दिया।

सवाल -  आप के फेवरेट सिंगर कौन हैं। 


जवाब - मेरे फेवरेट सिंगर है श्री कैलाश खेर जी और जनाब मुहम्मद रफी साहब जी। कैलाश खेर जी के साथ मैंने 2-3 ईवेंट किये हैं।वह गाते तो अच्छा हैं हीं, साथ ही जमीन से जुड़े नेक इंसान हैं तथा हर किसी के साथ उनका इंसानियत भरा व्यवहार है। मेरी भी ऐसी सोच है कि बड़ा कलाकार बनना ही काफ़ी नही है बल्कि इसके साथ-साथ बडप्पन होना भी जरूरी है और रफ़ी साहब इसलिये क्योंकि उनकी आवाज़ मुझे उनके रूह की आवाज़ लगती है। 

सवाल -  आप अभी तक कितने शो कर चुके हैं और आपकी उपलब्धियों अवार्ड के बारें में बतायें सर? 


जवाब- शुरुवात सुगम संगीत, भजन संध्या और गीत गजल के कार्यक्रमों में दुसरों के साथ गायन किया करता था। तत्पश्चात आज तक भारत में करीब 1800 के आसपास मैं अपने संगीत के कार्यक्रम कर चुका हूं। तथा बहुत ही जल्द अपनी टीम के साथ अमेरिका और 20 अन्य देशों मे अपने संगीत के कार्यक्रम प्रस्तुत करने के लिये चयनित हुआ हूँ। ये कार्यक्रम भारत सरकार के द्वारा प्रयोजित किये जा रहे हैं। स्कूल और कॉलेज स्तर पर मैने अनेक प्रतियोगिताओं में पुरस्कार प्राप्त किये हैं। मुझे संगीत के क्षेत्र में विदर्भ मित्र पुरस्कार, व्यॉयस ऑफ कार्पोरेट वर्ल्ड, मुहम्मद रफ़ी पुरस्कार, तथा इंडियन मेडिकल एसोसिएशन द्वारा स्किल सेल प्रोजेक्ट के लिये विशेष पुरस्कार मिले। 

सवाल - संगीत के क्षेत्र में आप एक जाना माना नाम है सभी आपको व्यॉयस ऑफ आर डी वर्मन कहते हैं, क्या कहना चाहेंगे? 


जवाब - मैं इस लायक तो नहीं सचमुच पर मेरे सभी शुभचिंतकों और प्रशंसकों का मेरी गायकी के प्रति जो प्रेम और सम्मान है। जिसके के लिए मैं आप सभी का तहेदिल से शुक्रिया अदा करता हूँ।

सवाल-   जीवन में क्या सपना है आपका ?


जवाब- संगीत के क्षेत्र में अच्छे काम करना और एक ऐसा मुकाम प्राप्त करना कि मुझे इस दुनिया से जाने के बाद, लोग मुझे मेरी आवाज़ और भारतीय संगीत के प्रति समर्पण के लिए याद रखे।

सवाल- खुद को एक लाईन में कैसे परिभाषित करेगें ?


जवाब- मैं “संगीत साधक जो “जीयो और औरों को जीने दो” के सिद्धांत का अनुसरण करता हूँ। ”

सवाल - युवा सिंगर जो म्यूजिक सिंगिंग फील्ड में आना चाहते हैं या संघर्ष कर रहे हैं उन्हें आप क्या मेसेज देना चाहेगें?


जवाब- सबसे पहले ये कहना चाहूंगा कि अपने मन में संयम रखें क्योंकि सफलता हासिल करने का कोई  भी शोर्ट्कट ना लें।संगीत की बेसिक शिक्षा या ट्रेनिंग अवश्य लें और अपने कला के प्रति ईमानदारी रखें। संगीत का मुख्य ध्येय है अपने कला के द्वारा लोगों के मन को छूना। अगर एक कलाकार के मन में गर्व, गुमान, अभिमान आ जाये तो देर सबेर उसकी कला पर ग्रहण लग जाता है।सो अपनी कला सृजन के साथ- साथ अभिमान को पास फटकने न दें। अच्छा गायक बनने के लिये अच्छा इंसान होना बहुत जरूरी है क्योंकि संगीत आत्मा की सुगंध है। 









Sunday, April 1, 2018

हर्षोल्लास से मनाया गया विश्वव्यापी भगवान श्री चित्रगुप्त प्रगटोत्सव :










कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के विश्वव्यापी मिशन भगवान श्री चित्रगुप्त जी का अवतरण पर्व प्रतिवर्ष मनाना और सर्व समाज में भगवान श्री चित्रगुप्त जी को स्थापित करना व समस्त कायस्थ कुलवंशजों को आर्थिक, सामाजिक व राजनैतिक रूप से मजबूत कर विश्व कायस्थ परिवारों को प्रेम, भक्ति और सहयोग के सूत्र में बांधने  पर बल देना ही कायस्थ वाहिनी का मुख्य उद्देश्य है।
        हमें बताते हुये अत्यंत प्रशंसा हो रही है कि गुरूदेव वाहिनी प्रमुख का 11 वर्ष का अपने आराध्य को सर्व समाज में स्थापित करने व विश्व भर के कायस्थों को एक मंच पर लाकर सभी को एकता सूत्र में पिरोने का एतिहासिक रूप 31मार्च 2018 को पूरे देश व विदेश, के 49 देशों में श्रद्धा रूप में देखा गया। जिसकी झलक निम्नवत् हैं -



कायस्थवाहिनी वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख, कायस्थ शिरोमणि  कायस्थ रत्न, कायस्थ कुलभूषण, गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के मार्गदर्शन में इस वर्ष 31मार्च 2018 की प्रभु चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की झाँकी। 


बस्ती उ. प्र में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम






उड़ीसा में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम 

हर्षोल्लास से मना भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्रगटोत्सव :


ओड़िशा न्यूज - 

राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण श्रीवास्तव जी 


 http://indiainside.org/post.php?id=2218
[01/04, 5:24 pm] 

http://www.jantajanardan.com/NewsDetails/38643/हर्षोल्लास-से-मना-भगवान-श्री-चित्रगुप्त-जी-का-प्रगटोत्सव.htm




कायस्थवाहिनी वाहिनी प्रमुख गुरूदेव पंकज भइया 
कायस्थ के मिशन प्रगटोत्सव के तत्वावधान में आज 
ओडिशा झारसुगुडा में अंतरराष्ट्रीय कायस्थ वाहिनी के पदाधिकारियों ने प्रदेश अध्यक्ष नेताजी पटनायक प्रदेश महासचिव प्यारेलाल श्रीवास्तव राष्ट्रीय महासचिव प्रवीण श्रीवास्तव राजनीति प्रकोष्ठ प्रदेश अध्यक्ष विकास वर्मा पूर्व राज्यसभा सदस्य प्रमिला जी चेयरमैन किशोर मोहंती जी जीवन मोहंती जी प्रशांत मोहंती जी मानस जी पटनायक 
जी तमाम कायस्थ परिवारों ने मिलकर भगवान चित्रगुप्त का प्रकट उत्सव बड़ी धूमधाम से मनाया और पूजा और आराधना की गई और वशिष्ठ लोगों को गले में साल डालकर सम्मानित किया गया गौरतलब हो कि हर वर्ष की भांति इस वर्ष भी  31मार्च, चैैत्र पूर्णिमा को ब्रह्मांड के उत्पत्ति कर्ता एवं विकास कर्ता, सभी जीवों की काया में स्थित उनके चित्त में गुप्त रहकर उनके अच्छे एवं बुरे कर्मों का लेखा-जोखा करने वाले उनके कर्मानुसार उन्हें फल देने वाले  ब्रह्मांड के न्यायाधीश  श्री चित्रगुप्त जी का प्रगटोत्सव बड़े हर्षोल्लास के साथ
 विश्व के 49 देशों में निवास कर रहे हिन्दु कायस्थ जाति एवं सर्वसमाज के लोगों ने मिलकर मनाया। धूमधाम से भजन कार्यक्रम कर सभी प्रभु की भक्ति में मंत्रमुग्ध रहे और भोजन की व्यवस्था से सभी ने प्रसाद ग्रहण कर कार्यक्रम का सफल समापन किया। 


नासिक में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम

कायस्थ रत्न अक्षय श्रीवास्तव जी
युवा सचिव महाराष्ट्र एवं विश्वप्रसिद्ध 
सिंगर ज्ञानेश वर्मा जी









http://www.amjabharat.com/2018/04/blog-post.html?spref=fb&m=1

http://jansaamna.com/?p=21667

नासिक में मना भव्य चित्रगुप्त प्रगटोत्सव :

वाहिनी प्रमुख गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के संघर्ष परिणामस्वरूप आज विश्व के 49 देशों सहित कल दिनांक ३१ मार्च भगवान श्री चित्रगुप्त जी के प्रगट उत्सव नाशिक में ज्ञानेश वर्मा जी और युवा सचिव अक्षय श्रीवास्तव महाराष्ट्र युवा सचिव कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय के खास योगदान व उपस्थिति में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। 
जिसमे खास उपस्थिति किरण शेंबेकर जी जिन्होने नाना पाटेकर की फिल्म फासी का फंदा मूवी में प्ले बैक सिंगर थे व पूरे देश में उन्हें दि वॉइस ऑफ किशोर कुमार जी* के नाम से जानते है साथ में पुणे के म्यूज़िक कम्पोज़र व गायक विनोद सुर्वे जी और मुंबई की जानीमानी कलाकार प्रियांक मुखर्जीजी उपस्थित थी।
इस कार्य क्रम रूपरेखा इस प्रकार थी।
१:- भगवान चित्रगुप्त जी की आरती व पूजन।
२:- साथ में सभी कलाकार के साथ भगवान चित्रगुप्त जी का एक भजन।
३:- गणेश वंदना।
और खुशी के बात यह है कि प्रभु श्री चित्रगुप्त भगवान पूजा और आशीर्वाद श्री किरण शेंबेकर (दि वॉइस ऑफ किशोर कुमार जी)द्वारा हुआ बहुत ही अच्छा लगा जो मेरे प्रभु के प्रति एक मारवाड़ी समाज के व्यक्ति ने इन्हे कहा कि यही वो भगवान जिनका उल्लेख रामायण में हुआ और इनके मंदिर भगवान श्री राम चन्द्र  द्वारा बना है अयोध्या में इन्हीं के पूजा अर्चना द्वारा ही श्री राम चन्द्र जी का राज तिलक हुआ था। इसी पुरातन संस्कृति के प्रचार प्रसार हेतु प्रति वर्ष इसी तरह मनाने का संकल्प लेकर कार्यक्रम का समापन 
हुआ। 


                                ॐ चित्रगुप्ताय नमः।

                     कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय इंडोनेशिया









कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय इंडोनेशिया दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर  श्री चित्रगुप्त भगवान के प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया ।इस अवसर पर बहुत से परिवार सम्मिलित हुए। आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद।


                                     ॐ चित्रगुप्ताय नमः।

कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिकट में रही भगवान श्री चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम :











कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय कनेक्टिकट द्वारा दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर श्री चित्रगुप्त भगवान के प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बहुत से परिवार सम्मिलित हुए। इस अवसर पर श्री चित्रगुप्त पूजन के साथ उत्तम भोजन की भी व्यवस्था थी। नए जुड़े परिवारों का श्री चित्रगुप्त भगवान  की का चित्र देकर अभिनंदन किया गया। इस सफल आयोजन के लिए आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद।




                   कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय डलास  , अमेरिका














कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय डलास (अमेरिका )द्वारा दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर  राधा गोविन्द धाम मंदिर के प्रांगण में श्री चित्रगुप्त भगवान के प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर। इस अवसर पर बहुत से परिवार सम्मिलित हुए। आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवम धन्यवाद।


                    कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय अटलांटा , अमेरिका













दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर, शनिवार को कायस्थ वाहिनी अटलांटा,अमेरिका  ने श्री चित्रगुप्त भगवान के प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया । उस पूजन में कई कायस्थ परिवारों ने अपनी सहभागिता की। सभी परिवारों को प्रगटोत्सव पर्व की बहुत बहुत बधाई एवं धन्यवाद ।


            मलेशिया में रही भगवान श्री  चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम :









                                    ॐ चित्रगुप्ताय नमः।
                     कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय  मलेशिया


दिनाँक 31 मार्च 2018 को गीता आश्रम, कुआलालंपुर के प्रांगण में श्री चित्रगुप्त प्रकटोत्सव का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मलेशिया के कई परिवार उपस्थित रहे। 


                        सिंगापुर में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम :







                                   ॐ चित्रगुप्ताय नमः।


कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय सिंगापुर द्वारा दिनाँक 31 मार्च 2018 चैत्र पूर्णिमा के शुभ अवसर पर श्री लक्ष्मी नारायण मंदिर के प्रांगण में श्री चित्रगुप्त भगवान के प्रकटोत्सव का भव्य आयोजन किया गया। इस अवसर पर बहुत से परिवार सम्मिलित हुए। आप सभी को बहुत बहुत बधाई एवम धन्यवाद।



                          गोवा में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम 




आज  भगवान् श्री चित्रगुप्त का प्रगटोत्सव,  श्री राम मंदिर, वरुणपुरी, वास्को डा गामा, गोआ में चित्रगुप्त फाउंडेशन ऑफ इंडिया एवं श्री चित्रगुप्त सभा, गोआ द्वारा बड़े ही धूम धाम से मनाया गया। महोत्सव की अद्यक्षता हमारे संस्थापक आदरणीय विजय कु० श्रीवास्तव एवं श्री चित्रगुप्त सभा के अध्य्क्ष श्री राजीव सिन्हा जी ने सामूहिक रूप से किया।
भगवान् श्री चित्रगुप्त के पूजन से महोत्सव की शुरुआत की गई तथा सांस्कृतिक कार्यक्रम के साथ एक भोज का भी आयोजन इन दोनों संस्थाओं द्वारा सामूहिक रूप से किया गया। महोत्सव में गोआ प्रान्त के लगभग 200 परिवारों ने हिस्सा लिया और भगवान् श्री चित्रगुप्त की महिमा को घर घर पहुचाने के संकल्प के साथ अपने कायस्थ समाज के दबे कुचले लोगो के मदद का भी प्रण लिया।
अभिषेक वर्मा
रा० प्रवक्ता
CFI (Reg.

                      छत्तीसगढ़ में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम



कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के संघर्षों के फलस्वरूप प्रगटोत्सव विगत वर्षों की तरह 49 देशों में बड़े ही हर्षोल्लास के साथ चैत पूर्णिमा को मनाया गया जिसमें कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय ने छत्तीसगढ़ प्रदेश में बड़े स्तर पर भगवान चित्रगुप्त जी का प्रकटोत्सव मनाया। इस दौरान जहां रायपुर, दुर्ग, खैरागढ़, कोंडागांव, नारायणपुर, डोंगरगढ़, भिलाई सहित अन्य जिलों और ब्लॉकों में शोभायात्रा और रैली निकाली गई, वहीं जगदलपुर में शाम को प्रस्तावित शोभायात्रा और भंडारे का कार्यक्रम भारी ओलावृष्टि के कारण स्थगित करना पड़ा। रायपुर में कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय की इकाई ने भव्य शोभायात्रा निकाली, वहीं दुर्ग में हनुमान जन्मोत्सव के साथ भगवान चित्रगुप्त जी का प्रकट उत्सव धूमधाम से मनाया गया। इस दौरान भी यहां विशाल बाईक रैली निकाली गई, जिसमें सभी वर्ग के लोग शामिल रहे। सफेद कुर्ता और नारंगी साफे के साथ लोग शोभायात्रा और रैली में शामिल हुए।दुर्ग में खास बात यह रही कि यहां कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय का हिंदू युवा वाहिनी ने सहयोग करते हुए संयुक्त रूप से विशाल बाइक रैली निकाली गई। जबकि नारायणपुर व कोंडागांव में भंडारा आयोजित किया गया, जिसमें बड़ी संख्या में भक्तों ने भगवान चित्रगुप्त का प्रसाद ग्रहण किया। इस दौरान बड़ी संख्या में समूचे प्रदेश के कायस्थ कुलवंशजों ने भगवान चित्रगुप्त जी का प्रकटोत्सव मनाते हुए इसे एक त्यौहार के रूप में मनाया। इस दौरान कायस्थ वाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख गुरूदेव  पंकज भैया कायस्थ  जी के मार्गदर्शन में छत्तीसगढ़ इकाई के अध्यक्ष ऋषि भटनागर, युवा अध्यक्ष वेदांत श्रीवास्तव, महिला उपाध्यक्ष प्रीति श्रीवास्तव, राजनीति प्रकोष्ठ के अध्यक्ष अटल श्रीवास्तव, सचिव मनीष श्रीवास्तव, अंशुल श्रीवास्तव, गौरव श्रीवास्तव, रवि सहाय भटनागर, सचिन श्रीवास्तव, सारंग श्रीवास्तव, लेखेश श्रीवास्तव, शिवांकित श्रीवास्तव, कुश श्रीवास्तव, विश्वास श्रीवास्तव, अतुल श्रीवास्तव, सौरभ श्रीवास्तव, श्रेया श्रीवास्तव, डब्बू खरे, आनंद सक्सेना, प्रकाश श्रीवास्तव, राघव श्रीवास्तव, गौरव बख्शी, निरंकार श्रीवास्तव, बबलू श्रीवास्तव, रौशनी श्रीवास्तव, मानसी श्रीवास्तव, तान्या श्रीवास्तव, शुभी श्रीवास्तव, श्रीति श्रीवास्तव, श्रेया श्रीवास्तव, समृद्धि श्रीवास्तव, वत्सला श्रीवास्तव, गीता श्रीवास्तव, लाजवती श्रीवास्तव, प्रियंका श्रीवास्तव, संगीता खरे, ज्योति श्रीवास्तव, पूर्णिमा श्रीवास्तव, ऋतु श्रीवास्तव, सरिता श्रीवास्तव सहित अन्य बड़ी संख्या में मौजूद थे।


                      गुजरात में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम - 






दिनांक 31-माचॅ शनिवार सांध्यकाल करीब 4:30,बजे गांधीधाम कच्छ गुजरात में स्थित 
श्री भगवान चित्रगुप्त जी के पावन प्रांगण में कच्छ कायस्थ संगठन की ओर से श्री चित्रगुप्त जी की पूजा अचॅना कर के प्रागटय् उत्सव  मनाया गया।जिस प्रागटय उत्सव ओर श्री हनुमान जन्मोत्सव में गांधीधाम कायस्थ समाज के प्रमुख श्री अनिलभाई श्रीवास्तव जी,धीरेन्द्रभाई श्रीवास्तव जी,मांडवी कायस्थ समाज के मंत्री भाविनकुमार आर.महेता अंजार कायस्थ समाज के प्रमुख श्री तेजसभाई मेहता,अखिल भारतीय कायस्थ महासभा गुजरात के प्रमुख श्री राकेशभाई मेहता ऐव कायस्थ राष्ट्रीय महीला मोचॉ के उप प्रमुख श्रीमती जयश्रीबेन मेहता आदी सब ओर अन्य कायस्थगण इस भगीरथ कायॅ का हिस्सा बने और साथ में समाजहित में काम करने की संयुक्त चचाॅ हुई जिसके अंतर्गत ऐक मंच पर सभी कायस्थगण आगे आऐ कच्छ का ऐक संयुक्त कायॅक्म हो 
ओर संगठन को मजबूत करने के लिए सहकार ओर सहयोग देने की बात की गई। इस प्रणाली को आगे बढ़ाने की बात की गई।



जिला औरैया उ. प्र में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम

फूलों से श्रंगार करते हुये। 


प्रगटोत्सव को प्रकाशोत्सव 
की तरह मनाया गया । 








https://youtu.be/Em3vOT-CFX8

https://youtu.be/j68VHuH-vxQ


जिला इटावा उत्तर प्रदेश में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम






     इंदौर - मध्यप्रदेश में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम






बहन आभा निगम जी (राष्ट्रीय सचिव - महिला) अंतराष्ट्रीय कायस्थ वाहिनीं
 आज 31 मॉर्च चैत पूर्णिमा को कायस्थ वाहिनी चित्रगुप्त वंशजों ने गीता भवन स्थित चित्रगुप्त भगवान जी के मंदिर में इकट्ठा होकर भगवान चित्रगुप्त जी का प्रकट उत्सव मनाया भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा के साथ लोगों ने मधुर भजनों की प्रस्तुति वह सत्संग का लाभ लोगों ने लिया इससे सभी बड़े आनंदित हुए आप सभी को चित्रगुप्त प्रकट उत्सव की बधाई व शुभकामनाएं। 


इलाहाबाद में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम






शोभित खरे इलाहाबाद जिला सचिव यूथ ब्रिगेड कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय व इलाहाबाद। 

इलाहाबाद में मना चित्रगुप्त प्रगटोत्सव :

कायस्थवाहिनी अंतर्राष्ट्रीय प्रमुख गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के संघर्ष परिणामस्वरूप आज चित्रगुप्त प्रगटोत्सव देश विदेश में हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। सभी ने भगवान श्री चित्रगुप्त की पूजा आरती कर अपने कर्मों के लेखा जोखा में प्रभु की कृपा दृष्टि बनी रहे के लिये प्रभु चित्रगुप्त जी को भजन आरती कर उन्हें मनाने का प्रयास किया। इस शुभ मौके पर सभी कायस्थ वाहिनी संगठन के पदाधिकारियों समेत अन्य सामाजिक कार्यकर्ताओं ने भी अपनी अहम भूमिका निभाकर प्रगटोत्सव पर्व को प्रति वर्ष हर्षोल्लास से मनाने का संकल्प लिये कार्यक्रम का समापन किया। ३१ मार्च २०१८ को हम सभी के कुल देव भगवान श्री चित्रगुप्त जी का प्रगट उत्सव मनाया गया। गुरूदेव श्री पंकज भईया जी के मार्गदर्शन से आज सुबह श्री चित्रगुप्त मंदिर, के.पी. कॉलेज ग्राउंड, इलाहाबाद, उत्तरप्रदेश में सर्व समाज के सहयोग से मनाया गया। और बहुत से समाज के लोगो ने इस कार्यक्रम में सहभागी हुए। इस कार्यक्रम को सफल बनाने हेतु शोभित खरे इलाहाबाद जिला सचिव यूथ ब्रिगेड कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय व इलाहाबाद हाईकोर्ट के वकील श्री तरुण श्रीवास्तव प्रदेश अध्यक्ष अधिवक्ता प्रकोष्ठ कायस्थ वाहिनी विशेष भूमिका में मौजूद थे । 

                   
                   दिल्ली में रही प्रगटोत्सव की धूम :







गुरूदेव पंकज भइया कायस्थ जी के निर्देशन में चैत्र पूर्णिमा 31मार्च दिन शनिवार को कायस्थ रत्न सुशांत जी, विनय श्रीवास्तव, उपेन्द्र श्रीवास्तव, रोशन श्रीवास्तव, हर्ष श्रीवास्तव, गौरव वर्मा, एवं गणमान्य सभी कायस्थ परिवारों ने मिलकर भगवान चित्रगुप्त जी की पूजा प्रार्थना कर कायस्थ एकता का संकल्प लिया और भण्डारा प्रसाद वितरण कर कार्यक्रम का समापन किया । 


बिहार में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम 





*कायस्थवाद परमोधर्म:*

*प्रभु श्री चित्रगुप्त जी* के आशिर्वाद से पूर्वी चम्पारण जिला के ग्राम मधुरापुर में *चैत्र पूर्णिमा, 31 मार्च* को *प्रभु श्री चित्रगुप्त का प्रगट उत्सव* मनाया गया।
जिसमें प्रभु स्तुति, प्रभु वन्दना एवं आरति हवन आदि का कार्यक्रम रखा गया, जिसमें कायस्थ कुल के कई सम्मानित व्यक्ति उपस्थित रहे।
गौरतलब है कि *प्रभु प्रगट उत्सव* इस बार पहली बार हमलोगों के द्वारा मनाया गया, जिसका सम्पूर्ण श्रेय *कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय प्रमुख पंकज भईया, सुशान्त श्रीवास्तव एवं अक्षय श्रीवास्तव जी* का रहा।
सचमुच *कायस्थ वाहिनी अनतर्राष्ट्रीय* से जुडकर मैं अपने को धन्य समझता हूँ। जिन्होंने हमें अपना ही धर्म समझने और पालन करने का उचित अवसर दिया।
आदरणीय पंकज भईया एवं समस्त कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय* को तहेदिल से आभार !!
अमित अशोक
पूर्वी चम्पारण जिला अध्यक्ष
*कायस्थ वाहिनी अन्तर्राष्ट्रीय*
मोतिहारी, बिहार


      लहार , भिंड - मध्यप्रदेश में चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम




आलोक श्रीवास्तव जी 
(प्रदेस उपाध्यक्ष यूथ) अंतराष्ट्रीय कायस्थ वाहिनीं व समस्त कायस्थ परिवार। 


      दतिया - मध्यप्रदेश में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम 





श्री  अवदेश सक्सेना जी , डॉ राकेश खरे जी , राजदीप  श्रीवास्तव  जी एवं समस्त दतिया कायस्थ परिवार। 


सीतापुर में रही भगवान श्री चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम :
पुरोहित हैं श्री सुरेन्द्र कुमार श्रीवास्तव।




बदायूं में रही चित्रगुप्त प्रगटोत्सव की धूम :



उत्तर प्रदेश कायस्थ परिवार के द्वारा बदायू में भगवान चित्रगुप्त जी का प्रकटोत्सव चैत पूर्णिमा (31 मॉर्च )बड़ी धूमधाम से मनाया गया कार्यक्रम में नगर पालिका परिषद की अध्यक्षा smt दीपमाला गोयल जी के साथ साथ समाज के प्रमुख लोगो व् कायस्थ समाज के बदायू में कार्य कर रहे प्रमुख पदाधिकारीगण ने कार्यक्रम में सहभागिता की प्रशाद के रूप में 250 लोंगो को भोजन कराया गया


जय हो भगवान श्री चित्रगुप्त जी की ।
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