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कविता: दर्द मेरा हमसफर

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दर्द मेरा हमसफर
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दर्द मेरा मरहम 
दर्द मेरा लवर 
दर्द मेरा हमसफर 
आज के रिश्ते
धन के
आज के नाते
धन के
आज की दोस्ती
झूठी
आज की हवा
प्रदूषित 
आज की प्रेमयात्रा
शुरू होती दोस्ती से
तलाशती प्रेम की मंजिल
पर ठहर जाती वासना पर
आज का प्रेम मुसाफिर 
थका हारा उदाशीन
ऐसी यात्रा क्या करनी
जिसकी मंजिल है धोखे
हजार इल्जाम लगाकर
दिलों ने दिल को तोड़ा
जब विश्वास है मरता
कोई न सामने दिखता
पास आते हैं आँसू
दर्द सीने से लगाता
खुशियां हैं खुशफहमी
रिश्तों में हेराफेरी 
पैसे की चमक में
लुट रही हसरत सबकी
हार के जब मुँह देखे
दुनिया ने अपने मुँह मोड़े
छोड़ के जातें सब जब 
साथ देता यही दर्द
कि देता हौंसला-हिम्मत
पोछ देता हर आँसू 
दिलाता याद तुझे तू
कर सकता है कुछ भी
तब याद आता हुनर 
टूट जाते हैं रिकॉर्ड 
पहुंचते फिर मंजिल से भी आगें
कहीं बजती हैं तालियां 
कहीं सुलग उठतें हैं दिल
मुलाकात खुद से 
करा देता है यही दर्द
तुझे इंसान बना 
देता है यही दर्द
दर्द मेरा इश्क है
दर्द मेरा गुरूर
दर्द मेरा लवर है
दर्द मेरा हमसफर 
दर्द जिंदगी की मोहब्बत 
दर्द जिंदगी की इबादत 
दर्द एक महान शिक्षक
दर्द एक कड…

सच की दस्तक नेशनल मैग्जीन में प्रकाशित हमारी कहानी '' किन्नर दिवस ''।

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सेक्सिस (एक शक्ति कथा)

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सेक्सिस
(Saxes) 
लक्ष्मी देसाई को आज मल्टीनेशनल कम्पनी से इंटरव्यू लैटर मिला |आज उसकी खुशी का ठिकाना नही था | ऐसा लगा मानो जिंदगी की सारी मेहनत सफल हो गयी | पढ़ाई में कम्प्यूटर डिप्लोमा कोर्सों पर जो धनराशि खर्च हुई थी | पढ़ाई के लिये जो लोन लिया था मानो सब की भरपायी हो गयी थी यानि सब बसूल | यह सोचकर वह खुशी-खुशी इंटरव्यू के लिये तैयार हुई और अपने माँ से आशीर्वाद लेकर वह इंटरव्यू देने बस से निकल गयी |    इंटरव्यू देने जिस ऑफिस में बुलाया गया था लक्ष्मी सकुशल समय पर वहाँ पहुंच गयी | वहाँ पहुंच कर उसने देखा कि ऑफिस के बाहर पड़ी ब्रेंच फुल है | वहाँ बहुत लड़कियाँ अपनी-अपनी बारी का इंतजार कर रही हैं |     कुछ ही देर में इंटरव्यू शुरू हो गया | यह देख लक्ष्मी की धड़कन बढ़ गयी कि पता नही मैं इंटरव्यू फेस भी कर पाऊँगी या नही | वह यह सोच ही रही थी कि उसने देखा इंटरव्यू रूम से जो लड़कियाँ बाहर आयीं वो रो रहीं थी | लक्ष्मी ने सोचा शायद ये सेलेक्ट नही हो पायीं इसलिये रो रहीं हैं | भगवान जाने मेरा क्या होगा और तभी लक्ष्मी का नाम पुकारा गया | अपना नम्बर आने पर लक्ष्मी खुश भी थी और घबरायी भी फिर उसने …

बवाल पेज-1 /नये अवतार में

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.....बवाल.....           (एक अश्रु कथा) 

आज उत्तर प्रदेश के भिमारी जिले में मेरी पहली पोष्टिंग भिमारी जिले की डी.एम गौरी संघाल के रूप में, मुझे मेरा ऑफिस मिला सामने अपनू कुर्सी देख मैं मन ही मन बहुत खुश हुई |आज डी.एम की कुर्सी पर बैठ ऐसा लगा मानो जिंदगी की सारी थकान मिट गयी क्योंकि बड़ी मुसीबत झेल के यहाँ तक पहुँची थी|ऑफिस में सभी लोगों द्वारा मिल रहा सम्मान देख,  मैं फूली न समा रही थी। ऐसा लगता रहा था मानो,  अाज खुद की किस्मत पर भी खुद को जलन सी हो जाये। सच कहूँ तो आज में बहुत खुश थी।  कुछ दिनों में मैंने महसूस किया कि यहाँ सभी मुझे अजीब नज़रों से देखते हैं...पता नहीं पर कुछ तो बात है| जिसे मैं पता कर के रहूंगी। मैंने सोचा कि दुनिया कहाँ की कहाँ पहुँच गयी और ये लोग यहीं अटके हुये हैं जो आज भी महिला प्रशासनिक अधिकारी को इस तरह धूरतें हैं। मैं मन ही मन सोचने लगी कि सचमुच इन लोगों का कुछ नही हो सकता। मैंने ऑफिस में बैठ-बैठे पूरे जिले के गाँव - कस्बों को नजदीक से देखने  का मन बनाया। क्योंकि  मैं उन लोगों को उनकी परेशानियों से निजात दिलाने की पूरी कोशिस करना चाहती थी|अॉफिस के लोग …