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भाषा का आशय एक पुनर्खोज

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भाषा के आशय का प्रभाव.....................
"स्त्री एवं पुरूष कल्याण हेतु   एक पुनर्खोज" :
वर्तमान में देश के समस्त परिवार न्यायालय स्त्रियों एवं पुरूषों के विवादित मामलों से पटे पड़े हैं आखिर क्यों? किसी भी आयु के स्त्री लिंगी व्यक्ति को उस आयु की स्त्री कहते हैं और किसी भी आयु के पुर्लिंगी व्यक्ति को उस आयु का  पुरूष कहते हैं | जीव विज्ञान के अनुसार स्त्री की उत्पत्ति समविभाजित 44 कोशिकाओं से होती है | इसलिये स्त्रियाँ प्रतिकूल परिस्थितियों में संतुलित रहती हैं | पुरूष की उत्पत्ति अविभाजित 43 कोशिकाओं से होती है | इसलिये पुरूष अनुकूल परिस्थितियों में भी असंतुलित रहते हैं | देश व दुनिया में जितनी भी सभ्यतायें पुरूषों ने विकसित की हैं वे स्त्रियों के सहयोग से ही विकसित हुई हैं | स्त्रियों की भाषा व्यवहारिकता की है और पुरूषों की भाषा सिद्धांत की है | अत:, स्त्रियों एवं पुरूषों को एक दूजे का आशय समझने के लिये एक दूजे की भाषा में वार्तालाप करना चाहिये |         द्वापर काल में महाभारतयुद्ध में जब अभिमन्यु की मृत्यु हुई तो श्री कृष्ण को मुस्कुराता देख अर्जुन ने कहा कि आपको कौन सी …

साक्षात्कार : बिहार से मायानगरी तक का सफर :

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सेलेब टाक : चर्चित "विलेन"                  'विजय कुमार' जी 
'विलेन का कभी विलय नही होता'
नमस्ते दोस्तों ! आइये आपको रूबरू कराते हैं टीवी सीरियल की दुनियाँ की जानी-मानी शख्शियत 'विजय कुमार' जी से | जो स्टार भारत टीवी चैनल पर नये कॉन्सेप्ट के साथ आपके बीच आपकी आशाओं पर खरा उतरने के लिये एक बेहतरीन इंटरटेनिंग शो निमकी मुखिया के जरिये आपके दिलों में उतरने के लिये पूरी सत्यनिष्ठा से अहम नकारात्मक सशक्त भूमिका के साथ दस्तक दे रहे हैं | जोकि मनोरंजन के महारथी, टीवी दुनिया के चर्चित विलेन, बहुमुखी प्रतिभा के धनी, बेमिशाल बेदाग सच्ची शख्शियत, सम्मानीय व्यक्तित्व 'विजय कुमार' जी से  बातचीत के कुछ अंश :
आकांक्षा -नमस्ते सर! आपका पूरा नाम क्या है?
नमस्ते ! मेरा पूरा नाम विजय कुमार है |

आकांक्षा -आपके जन्म स्थान के बारे में कुछ बतायें?
विजय - मैं बिहार के पटना जिले में  नौबटपुर कस्बे के छुटकी कोपा गांव का रहने वाला हूँ | 

आकांक्षा - आपने कहाँ तक शिक्षा प्राप्त की है ?
विजय-  मैंने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से सन् 1994 में ग्रेजुऐशन किया | इसके बाद फिल्म इंस्टीट…

छ्त्तीसगढ़ की शान ने बनाया अपना मुकाम...!

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साहेब दास मानिकपुरी

सेलेब टॉक : साहेब दास मानिकपुरी' जी 'धान के कटोरे से सितारे का उदय'
नमस्ते दोस्तों, आइये आपको रूबरू करवाते हैं छत्तीसगढ़ राज्य जोकि धान के कटोरे नाम से विख्यात है में जन्में एक किसान के सधारण से दिखने वाले असाधारण  बेटे से |  दोस्तों! इसी धान के कटोरे से हुआ एक महान सितारे का उदय जिसको चमकने से कोई ग्रामीण पृष्टभूमि हो या आई हो कैसी भी परिस्थिति कोई उनका रास्ता न रोक सकी| उस चर्चित शख्शियत का  नाम है 'साहेब दास मानिकपुरी' जी   जिनको आपने कई टीवी शो व कई फिल्मों तथा कई टीवी विज्ञापनों में देखा होगा जिनको कि आप "खिलौनी" नाम से भी पहिचानते है | आइये! बातचीत से जानते हैं साहेब जी के जीवन के कुछ अनकहे पहलू ......
आकांक्षा- नमस्ते सर आपका पूरा नाम क्या है?
साहेब - नमस्ते! मेरा पूरा नाम साहेब दास मानिकपुरी है|
आकांक्षा- आपके जन्म स्थान के बारे में बतायें ?
साहेब- मैं छत्तीसगढ़ राज्य के छोटे से गाव भैंसा संकरी (हथबंद) से हूँ | 
आकांक्षा- आपको अभिनय का सुरूर कब चढ़ा?
साहेब- मुझे ऐक्टिंग का कोई सुरूर नही था | मैं तो पढ़ने और नौकरी की तलाश में म…

महिला एवं बाल कल्याण हेतु पुनर्खोज :

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सिस्टम का प्रभाव  .......................

कैसे बनायीं जाती हैं संताने शैतान व हैवान? .....................................................


"जाको कष्ट विधाता देयी,ताकी मति पहले हर लेयी"

हिन्दुस्तान में जब आपसी असभ्य अमानवीय रिश्तों, मैत्री व सांस्कृतिक सम्बंधों के अनैतिक गुणमूल्यों के निजस्वार्थी व पराधीनता के अमानुष कर्म की एवं मर्यादाहीन असत्यवादी अमानुष धर्म की, सबका विभाजन व सबका विनाश की बदनियति एवं बदनीति की अस्वच्छ अलोकतांत्रिक राज्यव्यवस्था संचालन की विधायिका की संसदीय कार्य प्रणाली क्रियान्वित की जाती है तो देश के राजनैतिक समाज का मुखिया एवं देश की विधि के विधान का विधाता प्रधानमंत्री अपने पूर्वनियोजित मतिदान के धोखाधड़ी के अपराधिक षडयंत्र के द्वारा देश की वयस्क जनता की ईश्वर द्वारा प्रदत्त उसकी मति, दान के रूप में हर कर उसे मतिहीन बना देता है | ऐसे मतिहीन माता-पिता की संताने सिर के बल उल्टी जन्म लेती हैं जिन्हें सीधी बात आसानी से समझ में ना आकर, उल्टी बात ही आसानी से समझ में आती है | इन नवजात शिशु संतानों को जन्मजात ही सबसे पहली बार पशुओं का दूध पिलाया जाता है जिसस…

गाँधी जी की मौत पर होने जा रहा है बड़ा खुलासा....

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"अभिनवभारत संस्था की सराहनीय पहल" गाँधी जी की हत्या की पुन: जाँच एक महत्वपूर्ण कदम :
30 जनवरी सन् 1948 को प्रार्थना सभा में महात्मा गाँधी जी की तीन गोलियाँ मार कर हत्या कर दी गयी थी | इस मामले में नाथूराम गोडसे व नारायण आपटे को फाँसी की सजा के फैसले के विरूद्ध अपील पूर्वी पंजाब हाईकोर्ट में सन् 1949 में खारिज कर दी थी | प्रिरवी काउंसिल ने मामला यह कह कर वापस कर दिया कि जनवरी सन् 1950 में सर्वोच्च न्यायालय बन गया है जिसने कभी भी इस मामले की सुनवाई नही  की |    " अभिनव भारत संस्था,मुम्बई ' के शोधकर्ता एवं ट्रस्टी मुम्बई निवाशी श्री पंकज फड़नीस जी ने बोम्बे हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती देते हुये महात्मा गाँधी जी की हत्या की पुन: जाँच करवायी जाने हेतु एक याचिका माननीय सर्वोच्च न्यायालय में दाखिल कर कहा है कि इस सम्बंध में अमेरिका के पास काफी गोपनीय जानकारी है जिसे वे समय पर बतौर सबूत व दस्तावेज पेश करेगें |मा. सर्वोच्च न्यायालय ने इस याचिका के विश्लेषण हेतु अपना सहायक श्री अमरेन्द्रशरण एडवोकेट को नियुक्त किया है और कहा है कि इस मामले की सुनवायी कानून के मुताबिक की जायेग…

बने कट्टरतामुक्त भारत और प्रेमयुक्त भारत |

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कट्टरतामुक्त भारत ...........................

किसी भी चीज की
कट्टरता मानवता की
शत्रु है |
कट्टरता एक वायरस
की तरह है जिसने हम
सब को संकीर्णऔर
खोखला करके सारी
मुस्कुराहटें ही छीन लीं |
कट्टरता आपसी भाईचारे
का मार्ग अवरूद्ध कर
देती है | कट्टरतामुक्त
भारत हो तो सब शांति
और खुशी से रहें |
'बने एक सुन्दर भारत '

आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'


......चारो ओर सुख शांति और समृद्धि का वाश हो....!🌻🌸🌻🙏🙏🙏🌻🌸🌻


आकांक्षा सक्सेना
ब्लॉगर 'समाज और हम'

कहानी : ढोगीं बाबा की ट्रिक

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ढ़ोंगी बाबा
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दोपेहर का वक्त था | गाँव के अधिकांश पुरूष सभी खेतों में जुताई आदि कार्यों में व्यस्त थे और बच्चे स्कूल गये हुये थे और महिलायें घर में अकेली दरबाजे पर खड़ी होकर बातें कर रही थी कि बच्चें स्कूल से वापिस आ जायें तो उनको खाना खिलाकर फिर खेत में जाकर बच्चे के बाबा लोग को भी खाना पहुंचा आऊँ | यही वो दोपेहर का सही वक्त था जब गाँव में बाबा मांगने के बहाने लूटने को घूमने लगे कि महिलायें दान को मना नही करतीं | उन्हीं बाबाओं के साथ कुछ साध्वी हाथ में पम्पलेट लिये महिलाओं के पास जाकर बोलीं कि अरे ! ओ मांई ये लो बाबा शिवहरिज जी का पर्चा बाबा बहुत महान है कैलाश से बीस वर्ष तपस्या करके सिद्धियाँ लेकर लौटें हैं और उनके पास हर दुख - हर परेशानी का हल है | तुम्हारी फसल इस साल बहुत अच्छी होगी और तुम्हारा बच्चा उनकी कृपा से बहुत बड़ा आदमी बन सकता है | हम सब जो तुम्हारे सामने जिंदा खड़े हैं बाबा जी की कृपा से है | हम लोग ट्रैन हादसे में विकलांग हो गये थे पर देखो! बाबा जी की कृपा से हम ठीक हो गये और अब वही साक्षात् भगवान जी की सेवा में लगे हैं | हे! माँ…