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Showing posts from July, 2017

इंसानी चौंगा

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इंसानी चौंगा  ................................


दुनिया के रचियता ने सबसे बुद्धिमान प्राणी को रचा जिसमें प्रेम, दया,परोपकार, बुद्धि, विवेक, सोचने -समझने की शक्ति व मुस्कुरा के सभी के हृदय को जीतने की शक्ति और सहानुभूति और प्रार्थना स्वरों से किसी पीड़ित को नवजीवन देने की अपार शक्ति निहित थी | जिसमें सपनों और कल्पनाओं को साकार रूप देने की अनंत ऊर्जा विद्दमान थी जोकि दुनिया के रचियता की सबसे भरोसेमन्द और प्रिय रचना थी जिसे उसने नाम दिया "इंसान" | दुनिया के रचियता को पूरा विश्वास था कि यह प्राणी हमारा सहयोगी साबित होगा | यह प्राणी हमारी प्रकृति और हमारी अनंत रचनाओं का रक्षक होगा | दुनिया के रचियता ने उसे समझाया तुम्हारा होना, तुम्हारा कर्म प्रकृति के सभी जीवों की रक्षा और मेरी सभी रचनाओं का सेवाभाव से सम्मान करते हुये जीवन पथ पर सच्चाई और ईमानदारी से अग्रसर होना है तभी तुम्हारा इंसान होना और मेरा तुम्हें रचना सफल और सार्थक होगा | मैं अपनी सृष्टि के प्रत्येक प्राणी, इंसान को एक अदभुद प्रतिभा और ऊर्जा के साथ भेजता हूँ | मैं किसी को खाली हाथ नही भेजता और नही चाहता कि…

बदहाली ?

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बदलाव के बाद भी बदहाल है नारी ? ....... ......... ........ ........ ... ........


सबकुछ बदला पर सोच नही सबकुछ पाया पर प्रेम नही
सबकुछ मांगा पर बेटी नही सबकुछ दिया पर सम्मान नही
सबकुछ हारा पर अहंकार नही सबकुछ जीता पर हृदय नही
सबकुछ जागा पर आत्म नही सबकुछ प्यारा पर स्वप्न नही
सबकुछ छीना पर दर्द  नही सबकुछ  मिला पर हमदर्द नही
सबकुछ समझा पर इंसान नही सबकुछ मिटा पर अस्तित्व नही सबकुछ छूटा पर रूढ़िवाद  नही सबकुछ थमा पर अत्याचार नही
सबकुछ देखा पर सबूत नही सबकुछ मेरा पर वजूद नही
सबकुछ सूखा पर आंसू नही सबकुछ सहन पर अन्याय नही


हमें आजाद हुये 70वर्ष बीत गये पर आजादी के 70वर्ष बाद भी नही बदली तो नारी की बदहाली | देश के कुछ नेताओं की सेवाओं से हर वर्ष तालाब खुदे और सूखे पर नही सूखा तो नारी का आंसू | देश में मेक इन इंडिया की शुरूवात हुई पर वैल्यू इज वोमेन, रिस्पेक्ट इज वोमेन की शुरूवात नही हो सकी | कई तरह के सर्वे होते हैं हमारे भारत में पर आज तक यह सर्वे नही कि कितने लोग नारी का सम्मान करते | कितने लोग उसकी परेशानी में उसके साथ खड़े होते | समझ में तो यह नही आता जो काले मन का पापी व्यक्ति हमारी फूल …

बदलाव के बाद भी बदहाल है नारी ?

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बदलाव के बाद भी बदहाल है नारी ? .........  ....... ..    ...... .....




     अन्याय .................

सबकुछ बदला पर सोच नही
सबकुछ पाया पर प्रेम नही
सबकुछ मांगा पर बेटी नही सबकुछ दिया पर सम्मान नही
सबकुछ हारा पर अहंकार नही सबकुछ जीता पर हृदय नही
सबकुछ जागा पर आत्म नही सबकुछ प्यारा पर स्वप्न नही
सबकुछ छीना पर दर्द  नही सबकुछ  मिला पर हमदर्द नही
सबकुछ समझा पर इंसान नही सबकुछ मिटा पर अस्तित्व नही सबकुछ छूटा पर रूढ़िवाद  नही सबकुछ थमा पर अत्याचार नही
सबकुछ देखा पर सबूत नही सबकुछ मेरा पर वजूद नही
सबकुछ सूखा पर आंसू नही सबकुछ सहन पर अन्याय नही


बदहाल है नारी ?

हमें आजाद हुये 70वर्ष बीत गये पर आजादी के 70वर्ष बाद भी नही बदली तो नारी की बदहाली | देश के कुछ नेताओं की सेवाओं से हर वर्ष तालाब खुदे और सूखे पर नही सूखा तो नारी का आंसू | देश में मेक इन इंडिया की शुरूवात हुई पर वैल्यू इज वोमेन, रिस्पेक्ट इज वोमेन की शुरूवात नही हो सकी | कई तरह के सर्वे होते हैं हमारे भारत में पर आज तक यह सर्वे नही कि कितने लोग नारी का सम्मान करते | कितने लोग उसकी परेशानी में उसके साथ खड़े होते | समझ में तो यह नही आता जो …